800 Sq Ft प्लॉट से शुरू हुई करोड़ों की जालसाजी — इन्फ्लुएंसर पारुल की शिकायत पर क्राइम ब्रांच एक्शन में

Mp Update24 : मंगलवार को हुई पुलिस जनसुनवाई इस बार कई गंभीर मामलों से भरी रही। शहर के अलग-अलग हिस्सों से आए पीड़ितों ने धोखाधड़ी, गुंडागर्दी, महिला उत्पीड़न, संपत्ति विवाद और पारिवारिक झगड़े जैसी समस्याओं पर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। कुल 52 शिकायतें पूरे दिन सुनवाई में सामने आईं, लेकिन इनमें दो मामले इतने गंभीर थे कि पुलिस कमिश्नर ने तुरंत उन्हें क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। इन्हीं दो मामलों में से एक था — सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पारुल धोखाधड़ी मामला, जिसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया।

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पारुल धोखाधड़ी मामला: करोड़ों की जालसाजी का पर्दाफाश

जनसुनवाई में पारुल ने बताया कि कैसे उनके परिचित गौरव और उसकी सहयोगी शुभांगना ने मिलकर उनके साथ बड़ी जमीन खरीद धोखाधड़ी (Property Fraud) की। यह केस अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है, जहाँ लोग इसे एक बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फ्रॉड के रूप में देख रहे हैं।

800 वर्ग फीट का प्लॉट — साझेदारी में खरीदा, लेकिन…

पारुल के अनुसार:

  • तीनों—पारुल, गौरव और शुभांगना—ने मिलकर 800 sq ft का प्लॉट खरीदने का फैसला किया था।
  • सभी ने बराबर-बराबर ₹4–4 लाख दिए।
  • लेकिन रजिस्ट्री सिर्फ गौरव के नाम पर कराई गई।

यहां से पारुल के साथ संपत्ति विवाद धोखाधड़ी की शुरुआत हुई।

गौरव ने प्लॉट पर 20 लाख का बैंक लोन ले लिया

पारुल की शिकायत में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि रजिस्ट्री अपने नाम कराने के बाद गौरव ने उसी प्लॉट पर ₹20 लाख का बैंक लोन ले लिया।
और लोन की आधी EMI — लगभग ₹1,000 प्रति माह, साल 2020 से पारुल ही भर रही थीं।

इस प्रकार मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि बैंक लोन धोखाधड़ी और EMI फ्रॉड केस भी बन गया।

लिखित एग्रीमेंट भी चोरी!

पारुल ने बताया कि प्लॉट की खरीद पर तीनों के बीच लिखित एग्रीमेंट भी हुआ था, लेकिन गौरव वह दस्तावेज चोरी कर ले गया
यह एक बड़ा एग्रीमेंट चोरी मामला है, क्योंकि इसी दस्तावेज़ में असली साझेदारी का सबूत था।

गौरव और शुभांगना ने प्लॉट बेचकर फरार!

पारुल ने जनसुनवाई में बताया कि:

  • गौरव ने मौका पाकर विवादित प्लॉट किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया
  • इसके बाद वह फोन बंद करके फरार हो गया
  • जून 2025 में पारुल को इस धोखाधड़ी का पता चला।
  • तब से न उसका फोन मिल रहा है, न लोकेशन।

यह मामला अब एक बड़े रियल एस्टेट फ्रॉड न्यूज़ का रूप ले चुका है, जो शहर में चर्चा का कारण बन गया।

पुलिस एक्शन में – मामला सीधे क्राइम ब्रांच को सौंपा गया

पुलिस कमिश्नर ने पारुल की बात सुनते ही इस केस को गंभीर मानकर तुरंत क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया।
यह कार्रवाई साफ दिखाती है कि पुलिस इसे साधारण विवाद नहीं बल्कि करोड़ों की जालसाजी मामला मान रही है।

एडिशनल DCP राजेश दंडोतिया ने कहा:

“यह अत्यंत गंभीर मामला है। सभी साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”

क्राइम ब्रांच अब

  • बैंक लोन रिकॉर्ड,
  • रजिस्ट्री दस्तावेज,
  • खरीदारों से पूछताछ,
  • और गौरव–शुभांगना की लोकेशन
    की जांच कर रही है।

यह केस अब एक क्राइम ब्रांच जांच अपडेट के रूप में मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहा है।

पारुल की स्थिति: EMI भी भरी, पैसा भी लगाया, फिर भी खाली हाथ

पारुल ने कहा कि:

  • उन्होंने तीनों के बीच हुए सौदे पर भरोसा किया,
  • अपने हिस्से के 4 लाख रुपये दिए,
  • 4–5 साल तक EMI भी भरी,
  • लेकिन आज उनके पास न प्लॉट है, न दस्तावेज, न पैसे।

यह केस एक बड़ी चेतावनी है कि
‘रियल एस्टेट में भरोसा सबसे बड़ी गलती हो सकती है।’

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे फ्रॉड?

आजकल कई लोग—विशेषकर सोशल मीडिया पर सक्रिय—अपनी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रिश्तों में भरोसा बनाते हैं।
इस मामले में भी पारुल का परिचित होना ही उनके खिलाफ इस्तेमाल हुआ।

  • जमीन धोखाधड़ी
  • बैंक लोन फ्रॉड
  • कागज़ चोरी
  • भाग जाना

यह सब दिखाता है कि सरल दिखने वाले सौदों में कितना बड़ा जालसाजी नेटवर्क सक्रिय है।

सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया

इस मामले के बाहर आने के बाद लोग इसे एक बड़े
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विवाद,
जमीन खरीद घोटाला,
या संपत्ति धोखाधड़ी केस के रूप में देख रहे हैं।

कई लोग यह भी कह रहे हैं कि
यदि यह मामला सामने नहीं आता, तो गौरव किसी और के साथ भी वैसा ही कर सकता था।

अब आगे क्या होगा?

क्राइम ब्रांच की जांच में

  • बैंक की सहायता से लोन हिस्ट्री,
  • CCTV फुटेज,
  • खरीदारों से पूछताछ,
  • मोबाइल लोकेशन,
  • और चोरी हुए एग्रीमेंट के सबूत
    इकट्ठे किए जा रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि
“साक्ष्य मिलते ही गिरफ्तारी निश्चित है।”

समापन: न्याय की उम्मीद और धोखाधड़ी के खिलाफ सबक

पारुल धोखाधड़ी मामला सिर्फ एक इन्फ्लुएंसर का फ्रॉड नहीं, बल्कि आज के समय की वास्तविकता है जहाँ
भरोसा ही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है।

यह केस लोगों को सीख देता है कि

  • जमीन खरीदते समय सभी दस्तावेज खुद रखें
  • रजिस्ट्री में अपना नाम शामिल कराए बिना पैसे न दें
  • EMI भरने का प्रमाण भी सुरक्षित रखें
  • भरोसा केवल कागज़ पर रखें, ज़ुबान पर नहीं

क्राइम ब्रांच की जांच से पारुल के लिए न्याय की उम्मीद है, और यदि सबूत मिले तो आरोपियों पर बड़ी कार्रवाई तय है।

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